गुरुवार, 7 जुलाई 2011

बर्फ से...

एक समंदर है वहां हिलोरे मारता
लेकिन ढंका है बर्फ कि सिल्लियों से
ओ सूरज तुम इतना गर्म हो जाओ
कि पिघल जाये सारी बर्फ
इस तरह कि
समंदर में उठने लगे लहर
लील ले फिर चाहे वह
इस धरा को

ओ बर्फ
तुम क्यों जमी हो यहाँ
तुम जाओ पहाड़ों को ढको
समंदर से तुम्हारा क्या वास्ता

3 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

न जाने कितनी बर्फ जमीं है हमारी हिलोरों पर, पिघले या ऊपर चली जाये।

संजीव ने कहा…

बिम्‍बों में नव प्रयोग देखने को मिला, अद्भुत .

टिप्‍पणी में शब्‍द पुष्टिकरण हटावें जानकारी यहां है -

http://sanjeevatiwari.blogspot.com/2011/06/word-verification.html

लीना मल्होत्रा ने कहा…

o barf tum jami kyo ho yahan.. barf ko lagi yah fatkaar anubhootiyo ki oorja se janmi hai. vaah.