मंगलवार, 30 अक्तूबर 2012

फितरत

सड़क पर चले जा रहे हों आप 
और उड़ता हुआ कबूतर कर दे 
पीठ पर बींट तो क्या करेंगे आप 
यही न की कोई कपड़ा या कागज़ खोज
पोंछ लेंगे उसे 
और चल देंगे अपनी राह 

घर के बाहर खड़ी गाय 
जिसे अभी खाने को रोटी दी आपने 
वह कर जाये घर के आगे गोबर 
या खा जाये वह पौधा 
जिसे आपने बहुत प्यार से लगाया था 
और जिसमे अभी फूल खिलने ही को था 
तब क्या करेंगे सिवाय इसके 
की गोबर को दरवाज़े के आगे से हटायेंगे 
और पौधे की थोड़ी पुख्ता 
करेंगे सुरक्षा 

गली का कुत्ता 
जिसे आप रोज़ दुलारते हैं 
कर ही जाता है कई बार 
बच्चों की गेंद पर पेशाब 
तब कुत्ते को समझाने तो नहीं जाते आप 
समझाते बच्चों को ही हैं 
और गेंद को कर लेते हैं पानी से साफ़ 

आपकी अपनी फितरत है 
और दुनिया की अपनी 
इसमें कैसी शिकायतें 
जिसे जो आता है 
मनुष्य भी वही करता है 

4 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सही ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

स्वभाववश किया या जानबूध कर किया, ज्ञात तो हो जाता है।

Parul ने कहा…

Devyani, bahut hi sundar kavitaayein hain. Touching and deep.

Parul ने कहा…

Devyani, bahut hi sundar kavitaayein hain. Touching and deep.