रविवार, 9 अगस्त 2009

बदनाम लड़कियां

बदनाम लड़कियां
देर तक रहती हैं
लोगों की याद में
उनसे भी देर तक
याद रहते हैं उनके किस्से

बरसों बाद
बीच बाजार
दिख जाती है जब
अपनी बेटी का हाथ थामे
अतीत से निकल कर चली आती
ऐसी कोई लड़की

उसके आगे-आगे
चले आते हैं याद में
वे ही किस्से
और
ठिठक जाता है एक हाथ
पुरानी दोस्ती की याद में
उसकी ओर बढ़ने से
ठीक पहले

26.6.09

5 टिप्‍पणियां:

amarjeet kaunke ने कहा…

बहुत ही संवेदनशील कविता, मुझे नहीं लगता
आज तक किसी कवि ने इन बदनाम लड़किओं
के बारे में इतनी संवेदना और प्यार से सोचा
और लिखा हो.....आपके पास कहने के लिए
बहुत कुछ है.......दुआगो .....अमरजीत कौंके

गिरिराज किराडू/Giriraj Kiradoo ने कहा…

welcome to the virtual!

चण्डीदत्त शुक्ल ने कहा…

अद्भुत शब्द संयोजन...कड़वा है पर सच है. लिखती रहें लगातार.

Sanjay Maharishi ने कहा…

lovely poem, devyani. sudenly reminded me of the wonderful badnam ladkian i knew in school, college.
its the first time i'm reading your poem, i think you write very gently.

अतुल प्रकाश त्रिवेदी ने कहा…

खूबसूरत . दूसरा शब्द नहीं लिखूंगा